Wednesday, 8 August 2012

आंसू भी  मुस्काते हैं  
 
 
 
कहने को ये आंसू हैं
पर  मुस्काते हैं   क्योंकि
मुस्काते  तुम्हारे  कई  चेहरे
इनको   दिख जाते  हैं
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तुम्हारे लबों के   रंग
जब इनमें समाते  हैं  
हर तरह के दुःख को
ये विसराते हैं
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तुम्हारी बातों पर खुश
ये जब खुद को पाते हैं
अकेले में ख़ुशी को
ये दोहराते हैं
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पता नहीं कहाँ पर
ये छुप जाते हैं
जब सामने अपने
तुमको ये पाते हैं
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कहने को ये आंसू है
पर  मुस्काते  हैं  क्योंकि
मुस्काते  तुम्हारे  कई  चेहरे
इनको  दिख जाते  हैं

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