Tuesday, 7 August 2012

फूल सी हंसी तुम्हारी

फूल सी हंसी तुम्हारी
गुलाबी कर गयी
कजरारी नज़र प्यार भरी
शायरी कर गयी
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बातों की तुम्हारी  रोज़ कई
महफ़िल जमी रही
ऐसा कुछ असर
तुम बेहिसाबी कर गयीं
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लफ्ज़-लफ्ज़ तुम्हारा
देता रहा जब साथ
मन को मुस्कराने का
तुम आदी कर गयीं
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सदा झूलते रहे दो फूल
एक दूजे की बाँहों में
प्यार की कहानी को
तुम इतना  किताबी कर गयीं
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वो तुम्हारी कमसिन शरारतें
वो तुम्हारा रंगीला शोर
खेल खुशियों संग
खुशियाँ बेशुमारी कर गयीं
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फूल सी हंसी तुम्हारी
गुलाबी कर गयी
कजरारी नज़र प्यार भरी
शायरी कर गयी

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