Tuesday, 25 September 2012

चाँद ने लिखा है पानी में
 
 
चाँद ने लिखा है पानी में
 
जब से तुम्हारा नाम
 
तुम्हारी तरह हंसती  है
 
हर सुबह,हर शाम
 
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एक पल में भर लेता है
 
दिल तुम तक उड़ान
 
और करती हैं निगाहें तुमसे
 
मेरे  प्यार का  बयान
 
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तुम से है ज़िन्दगी
 
तुम से ही जहान
 
हर ज़ज्बात को
 
दी है तुमने एक नई पहचान
 
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 पंछी आज भी लाते हैं
 
तुम्हारे ही पैगाम
 
ख़त पर लिखा होता है
 
तुम्हारे हाथ  से मेरा नाम
 
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 चाँद ने लिखा है पानी में
 
जब से तुम्हारा नाम
 
तुम्हारी तरह हंसती  है
 
हर सुबह,हर शाम
हवा चली है अभी अभी



हवा चली है
अभी अभी
अभी तो तुम
मुस्काई हो
**



बादल बनकर
कहाँ से तुम
मुझ तक उड़कर
आई हो
****

आसमां कहाँ
इतना चमकता है
अपने नूर से तुम
चमकाई हो
***
बाग में देखा
हर डाल पर
एक फूल सी तुम
अंगड़ाई हो
***
कोयल की कूक में
बांसुरी सी
शायद धुन तुम ही
बजाई हो
***
मोर नाच रहा
है जंगल में
वो नाच तुम ही
सिखाई हो
***
हवा चली है
अभी अभी
अभी तो तुम
मुस्काई हो
**
बादल बनकर
कहाँ से तुम
मुझ तक उड़कर
आई हो