आंसू भी मुस्काते हैं
कहने को ये आंसू हैं
पर मुस्काते हैं क्योंकि
मुस्काते तुम्हारे कई चेहरे
इनको दिख जाते हैं
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तुम्हारे लबों के रंग
जब इनमें समाते हैं
हर तरह के दुःख को
ये विसराते हैं
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तुम्हारी बातों पर खुश
ये जब खुद को पाते हैं
अकेले में ख़ुशी को
ये दोहराते हैं
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पता नहीं कहाँ पर
ये छुप जाते हैं
जब सामने अपने
तुमको ये पाते हैं
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कहने को ये आंसू है
पर मुस्काते हैं क्योंकि
मुस्काते तुम्हारे कई चेहरे
इनको दिख जाते हैं





